Vatan Ki Meeti - वतन की मिट्टी - Amar Ujala Kavya
वतन की मिट्टी के खातिर, दफन कर गये वो अपने सारे अरमान हँसते- हँसते सूली पर झुले थे, ऐसे थे वो माँ भारती के नौजवान इंकलाब-जिंदाबाद के नारों से, गुंज उठा था हिंदुस्तान भय. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala kavya.