ता. 19-11-2021
गोर बंजारा इतिहासकारों एवं विचारवंतोके लिये डॉ. एस. एल. निर्मोही और डॉ. नवल वियोगीकी रचनाओंसे कुछ महत्त्वपूर्ण संदर्भ
1) नाग लोक (साप नही) मानव थे। (डॉ. सी. एफ. ओल्डाम) वे पश्चिम एशिया (असिरियासे) आये थे और राक्षस नहीं बल्कि मानव/मनुष्य थे।
2) उत्तर भारतमे तक्षशिला नाग लोगोंका मुख्य केंद्र था।
3) तक्षक यह नाग लोगोंका मुखिया (राजा था) और वह तक्षशिला मे रहता था। यह तक्षशिला नाम तक्षक के नामसे पड़ा था।
4) नाग लोक इराणसे चलकर अफगाणिस्थान (काबुलमे) आ बसे थे। उसके बाद उन्होंने भारतमे प्रवेश किया, जिसका प्रमाण तक्षशिला है।
5) विद्वानोंका मानना है कि, ऑस्ट्रेलियन तथा भूमध्य सागर तटीय लोगोंकी उत्पत्ति भूमध्यसागर पूर्व तटीय क्षेत्रोंमे हुयी। नागपुजाकी उत्पत्ति वास्तव में पश्चिम एशियासे हुयी ऐसा माना जाता है। वहांसे बादमें इजरायल, फिलीस्तीन, असीरिया, बेबीलोन, मेसोपोटामियामे और पड़ोसी देश मिश्र और ग्रीस (युनानमे) फैल गयी। नागपाल नाम के राजासे नागवंश शुरु हुआ होगा।
6) दो नदियोंके मध्यभागको ग्रीक भाषामें मेसोपोटामिया कहते है। दज़ला और फ़रात नदी के बीचका यह मैदान है। एक काली चमडीवाली जाति उत्तर-पश्चिम भारतसे आयी और यहा बस गयी। वे स्वयंको कालेसिरवाले याने सुमेर के लोग पुकारते थे। ये दुनियाके पहले आदमी थे, जो सभ्य हुये। मेसोपोटामियाके मैदानमे उनका प्रवेश इ.पू. 5000 में हुआ था।
7) खासी, नाग, कुकी, बोदो, कोलीय, पायो, अंगामी, रेंगम ये जातियां हैं। खासी जाति दिनारिक प्रकारकी अल्पाईन जाति है।
8) द्रविड लोग जो सिंधू घाटीके सृजनकर्ता है, वे सुमेरसे आये थे।
9) वृत्र, अहि, नाग, दास एकही है। अहिवृत्र यह सिंधू लोगोंका प्रमुख था।
10) आंध्र, पुंड्र, सबर, पुलींद आदी दसु जातिके बताये गये है। बुद्ध यह इक्ष्वाकुवंशी थे। शाक्य गण यह वज्जी महासंघका एक घटक था। सार्थवाह यह एक व्यापारी महासंघ था। शिशुनाग विदेहोंकी संतान थे और विदेह इक्ष्वाकुवंशी एक शाखा थी। वैदेहिक यानी बैलो और गाडियोंपर माल ढोनेवाला समुह था। सार्थवाह और वैदेहिक व्यापार भी करती थी। विद्वानोंने वास्तवमें इस जनजातिकी तलाश या खोज नही की। ये चरवाहक का भी काम करते थे। इनके ?