Swatantrata Ka Parv - स्वतंत्रता का पर्व - Amar Ujala Kavya
बहुत देखी गमगीन गुलामी आजादी के वीरों ने कतरा कतरा बहा दिया भारत माता के चरणों में भारत देश हमारा सोने की चिड़िया कहलाता था देश का परचम खुले गगन में लहर -लहर लहराता. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala kavya.