Jawan Ye Hind - जवान-ए-हिन्द - Amar Ujala Kavya
जवान-ए-हिन्द पर गुमान करता हूँ नाज वतन के हर जवान पर करता हूँ कातिब हूँ यारों न तीर से न तलवार से अरि पर शब्दों का तीखा वार करता हूँ । प्रेमयाद कुमार. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala kavya.