Apne Mulk Me - अपने मुल्क में - Amar Ujala Kavya
अपने मुल्क में अपनों की खुशियों पर,गैरों के पहरे देखे हैं, उन सौदागरो के जुल्म के, हर चेहरे देखे हैं। नोचा गया पंखों को सोने की चिड़िया के, हमने आंचल में ज़ख्म भारत मां. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala kav