Mugudh Chandani - मुग्ध चांदनी - Amar Ujala Kavya
मुग्ध चाँदनी भींगी रातें, मध्यम मध्यम रस बरसाते, बैठें है यूँ नदी किनारे, कुछ बोलेंगे कुछ सुन लेंगे, मन ही मन में मुस्काते, मुग्ध चाँदनी भींगी रातें, शांत शांत धारे में उतरी, पानी का. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala