Sahir Ludhiyaanvi - साहिर लुधियानवी - Amar Ujala Kavya
साहिर लुधियानवी साहिर तेरे तरकश में, दिलकश है हर तीर, मयकशी है ,कहकशां है,है पराई पीर। संजीदा है, कशमकश है, जुदा है हर तदबीर। बेगुनाही है,रहनुमाई है, है इल्हाम लिए हर तामीर। दर्द है,. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala