Humara Desh - हमारा देश - Amar Ujala Kavya
हैं मत मजहब धर्म अलग पर बात यहाँ यह राहत की एक कड़ी में जुडी हुई हैँ हम संतानें भारत की भिड़ जाते हैं तूफानों से लोहा परवत से लेते तारीफें करता दुश्मन. Read more hindi poetry, hindi shayari, hindi kavita on amar ujala kavya.